एक बात


कई जख्म उभर आते है आज भी जहन में जब उसका नाम पढ़ती हुँ कही भी।

ना जाने क्या था ऐसा जो उसके जाने के बाद भी बाकी है।

रुक जाती हुँ आज भी जब कही उसका जिक्र सुनती हुँ, लगता है जैसे कल ही कि बात हो जब उसने मुझसे अलविदा कहा था। 

जाते हुये एक बार पीछे पलट के भी नही देखा उसने।

उसे तो पता भी नही होगा मैं उसका इंतजार करती रही,बस ये सोचकर कि शायद ये उसकी कोई नाराजगी रही हो।

लेकिन ये तो एक बहाना था उसका मुझसे दूर जाने का।

है कई सवालात मेरे जिनके जवाब अब शायद कभी न मिले 

लेकिन उन्ही सवालो के दम पर आज तक मैंने किसी को दिल मे बसाया नही।

जब मिलेगा वो दुबारा तो पूछुंगी उससे, खैर ये अलग बात है कि वो मुझे पहचान ही ना पाए।

इस जिंदगी ने मुझे काफी हद तक बदल दिया है, बस न बदला तो उसका नाम जो मेरे दिल में आज भी उसी कदर धड़कता है।

9 thoughts on “एक बात

  1. Riya its so beautifully written , matlab i can feel each emotions and believe me u penned all emotions in a very beautiful way 👍🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

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